उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली के दौरान प्रदूषण को कम करने के लिए तकनीक-आधारित योजना बनाई.
देहरादून: दीपावली से पहले उत्तराखंड में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तकनीक आधारित समाधान तलाश रहा है. त्योहार के दौरान पटाखों, वाहनों और अन्य गतिविधियों से प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए अभी से विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है. इसमें प्रदूषण की निगरानी, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और समय रहते नियंत्रण के उपायों पर फोकस रहेगा. हालांकि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुछ खास करने का प्लान बनाया है और इसमें ऐसे स्टार्टअप को विशेष प्राथमिकता देने पर भी विचार चल रहा है, जोकि पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने से जुड़े हुए हैं.
दीपावली में अभी वक्त है, लेकिन त्योहार के दौरान आतिशबाजी से बढ़ने वाले प्रदूषण को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लेकर भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तक इस बार प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पहले से प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है. इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और तकनीक के इस्तेमाल से प्रदूषण की निगरानी करने पर फोकस किया जा रहा है. कोशिश है कि दीपावली के दौरान प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने से पहले ही जरूरी कदम उठा लिए जाएं.
दीपावली और उसके आसपास के दिनों में पटाखों के इस्तेमाल से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है. कई बार हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाती है. ऐसे में इस बार प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल आतिशबाजी को लेकर जागरूकता फैलाने तक सीमित रहने के बजाय ट्रैफिक प्रबंधन, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और खुले व कच्चे मार्गों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने जैसे उपायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
ट्रैफिक जाम से लेकर ग्रीन दिवाली तक पर फोकस: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दीपावली के लिए तैयार की जा रही कार्ययोजना में कई पहलुओं को शामिल किया जा रहा है. इसमें लोगों को कम आतिशबाजी करने के लिए जागरूक करने, ग्रीन दिवाली मनाने का संदेश देने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे उपाय शामिल है. इसके अलावा निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल को नियंत्रित करने और कच्चे मार्गों को पक्का कर धूल के उत्सर्जन को कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है.
स्कूलों के माध्यम से बच्चों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने की योजना भी इस प्रयास का हिस्सा है. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लोगों की भागीदारी बढ़ाई जा सके.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से दीपावली के दौरान जरूरत के अनुसार ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव करने जैसे तकनीकी उपायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि ऐसे उपायों का प्रभाव संबंधित क्षेत्र, मौसम और प्रदूषण के स्रोतों पर निर्भर करेगा.
प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्टार्टअप और तकनीक की मदद: प्रदूषण नियंत्रण के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भारत सरकार के स्तर पर भी जोर दिया जा रहा है. इस दिशा में ऐसे स्टार्टअप को प्राथमिकता देने की बात कही गई है, जो प्रदूषण की निगरानी और उसके प्रभावी नियंत्रण में उपयोगी साबित हो सकते हैं.
इसमें एयर क्वालिटी मैपिंग, प्रदूषण की निगरानी करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान और कचरे का बेहतर प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने और तकनीक आधारित यातायात प्रबंधन के जरिए प्रदूषण कम करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
तकनीक आधारित इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण के स्तर और उसके कारणों की बेहतर पहचान कर समय रहते नियंत्रण के कदम उठाना है. इससे दीपावली के दौरान ही नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है.
दीपावली के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों के साथ चर्चा कर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रयास है कि त्योहार से पहले ही प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी जरूरी उपायों पर काम कर लिया जाए.
-पराग मधुकर धकाते, सदस्य सचिव, PCB-
प्रदूषण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल की एक निश्चित सीमा तय करने पर विचार किया जाना चाहिए. पटाखे बनाने वाली कंपनियों को भी सशर्त अनुमति दी जानी चाहिए. इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके उत्पादों से वायु और ध्वनि प्रदूषण न्यूनतम हो.
-एचपी भट्ट, पूर्व डीन, अर्थ साइंस-
दीपावली से पहले शुरू हुई यह तैयारी अब इस बात पर निर्भर करेगी कि कार्ययोजना के उपाय जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होते हैं. जागरूकता, तकनीक और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के बीच बेहतर समन्वय ही त्योहार के दौरान हवा की गुणवत्ता को लेकर पैदा होने वाली चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा.


