मुख्यमंत्री के लिए कुछ महीनों की खातिर हेलीकॉप्टर किराए पर लिया गया है. यह हाईटेक हेलीकॉप्टर है. सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है.
देहरादून: उत्तराखंड में सरकार किराए के उड़नखटोले पर उड़ रही है. जाहिर है कि बात हेलीकॉप्टर की है तो इसका किराया भी भारी भरकम ही होगा. हालांकि फिलहाल चर्चा किराए को लेकर नहीं बल्कि सरकारी नए हेलीकॉप्टर की अटकी खरीद को लेकर है. जिसपर अब भी विचार ही चल रहा है. इस बीच संबंधित हेलीकॉप्टर की कीमत भी करीब 90 करोड़ से बढ़कर अनुमानत 130 करोड़ तक पहुंच गई है.
नीले हेलीकॉप्टर का बिगड़ता स्वास्थ्य: उत्तराखंड में नीले रंग का सरकारी हेलीकॉप्टर प्रदेश के दुर्गम क्षेत्र से लेकर हर जिले के दर्जनों इलाकों तक माननीयों को पहुंचा चुका है. साल 2003 में लाए गए इस हेलीकॉप्टर की उम्र अब करीब 23 साल हो चुकी है. कोई भी साल हो या कोई भी मौसम, यह हेलीकॉप्टर राज्य के कोने-कोने तक अपनी गड़गड़ाहट की आवाज से पहचाना गया है. कभी शान के साथ इस पर हवाई सफर करने वाले माननीय अब नए हाईटेक हेलीकॉप्टर्स की सैर करना पसंद कर रहे हैं. इसके पीछे की वजह समय के साथ हेलीकॉप्टर का बिगड़ता स्वास्थ्य है.
कई बार खराब हो चुके हैं पार्टस: दरअसल सरकारी हेलीकॉप्टर जैसे-जैसे पुराना हो रहा है उसके तमाम हिस्सों में दिक्कतें आने लगी हैं. कई बार तो अलग-अलग पार्ट्स के खराब होने के बाद उन्हें विदेशों से भी मंगाया जा चुका है. जाहिर है कि हेलीकॉप्टर के प्रत्येक हिस्से के विदेश से आने के कारण कई बार इसे महीनो तक उपयोग में नहीं लाया जा पाता. नतीजतन माननीयों के दौरों और कार्यक्रमों पर भी इसका असर पड़ता है.
यूकाडा ने किराये पर लिया हेलीकॉप्टर: शायद यही कारण है कि लगातार आ रही परेशानियों के चलते अब यूकाडा ने मुख्यमंत्री और माननीयों के लिए हेलीकॉप्टर किराए पर ले लिया है. या यूं कहे कि अब करीब 2 से 3 महीनो के लिए हेली कंपनी से अनुबंध कर लिया गया है. यह सौदा ना तो आसान है और ना ही सस्ता. काफी भारी भरकम रकम देकर हेली कंपनी से उड़ान के लिए अनुबंध की गया है. हालांकि यह बाजार मूल्य के हिसाब से ही है लेकिन फिर भी हवाई सफर को करने वाले हेलीकॉप्टर की महंगी कीमतों और लागत के कारण इसका वहन करना काफी खर्चीला है.
क्या कहते हैं अधिकारी: इस मामले पर यूकाडा के ACEO संजय टोलिया कहते हैं कि मुख्यमंत्री के लिए कुछ महीनों की खातिर हेलीकॉप्टर किराए पर लिया गया है. यह हाईटेक हेलीकॉप्टर है. सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है.
दरअसल किराए पर हेलीकॉप्टर लेना काफी महंगा होता है. इसका किराया भी घंटे के हिसाब से दिया जाता है. इसमें करीब 4 लाख रुपए प्रति घंटा के हिसाब से कंपनियां किराया वसूल करती हैं. हालांकि इसमें पायलट की फीस से लेकर दूसरी तमाम व्यवस्थाएं भी शामिल हैं.
हेलीकॉप्टर को लेकर हमलावर कांग्रेस: इस मामले पर चर्चाओं के बीच कांग्रेस सवाल खड़े करते हुए दिखाई देती है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार कोई भी निर्णय सही समय पर नहीं ले पाती. उन्होंने कहा सरकार निर्णय लेने में बेहद कमजोर है. यदि सरकार को नए हेलीकॉप्टर की जरूरत थी तो उसे पहले ही खरीद लेना चाहिए था. समय के साथ अब हेलीकॉप्टर की कीमतें भी बढ़ रही हैं. ऊपर से किराए पर हेलीकॉप्टर लेकर राज्य पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ रहा है.
हेलीकॉप्टर को लेकर तुलनात्मक आंकड़े: अब हेलीकॉप्टर को लेकर आंकड़ों पर तुलनात्मक विचार करें तो यह बात साफ दिखती है कि हर साल हेलीकॉप्टर की कीमतों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. यही नहीं साल दर साल हेलीकॉप्टर की तकनीक भी ज्यादा अपडेट हो रही है. जिसका असर कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है.
35 से 40 करोड़ महंगा हुआ हेली: मौजूदा नए हेलीकॉप्टर पर कीमतों के लिहाज से बात करें तो जिस हेलीकॉप्टर का चयन यूकाडा ने करीब 3 साल पहले किया था. उसकी कीमत 80 से 90 करोड़ रुपए थी. अब इस हेलिकॉप्टर को खरीदने पर इसकी कीमत करीब 130 करोड़ रुपए पड़ रही है. यानी ये हेलीकॉप्टर करीब 35 से 40 करोड़ रुपए महंगा हो चुका है.
हेलीकॉप्टर डिलीवरी में लगते हैं दो साल: इसमें खर्चे के रूप में देखें तो यह केवल हेलीकॉप्टर की कीमत है. इस हेलीकॉप्टर खरीद को लेकर ऑर्डर करने के बाद इसकी डिलीवरी करीब 2 साल बाद होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि हेलीकॉप्टर खरीदने की डिमांड के बाद इसके तमाम पार्ट्स लगाकर नया हेलीकॉप्टर बनाया जाता है. फिर इसके विदेश से भारत आने तक की प्रक्रिया में भी कुछ समय लगता है. खास बात यह है कि हेलीकॉप्टर की कीमत के अलावा इसके लिए पायलट और दूसरे स्टाफ का खर्चा अलग से है. ये खर्चा सालाना 2 से 3 करोड़ रहता है.
उधर किराए वाले हेलीकॉप्टर का खर्चा भी राज्य में हो रही उड़ानों के हिसाब से 5 साल में करीब 35 करोड़ तक अनुमानित है. इस तरह इन्हीं आंकड़ों को देखते हुए सरकार को नए हेलीकॉप्टर पर विचार करना है. माना जा रहा है कि अब हेलीकॉप्टर खरीद को लेकर सरकार चुनाव के बाद ही कोई विचार करेगी. यूकाडा के ACEO संजय टोलिया भी इसकी पुष्टि करते हैं.
कांग्रेस के हमलों पर बीजेपी का पलटवार: जहां तक कांग्रेस के आरोपों का सवाल है तो इस पर भाजपा के नेता भी अपना अलग तर्क देते हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल गोयल कहते हैं कि सरकार हेलीकॉप्टर को खरीदने का फैसला सोच समझकर करती है. यदि किसी हेलीकॉप्टर की कीमत बढ़ गई है तो 3 साल पहले भारी भरकम रकम खर्च ना करने के चलते अब तक उस रकम को सरकार ने बचाया भी है. इसके बावजूद सरकार सुरक्षा के लिहाज से अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर खरीदने पर ही विचार करेगी. इसलिए कांग्रेस के आरोपों में कोई दम नहीं है.