दिल्ली पुलिस नशे और अपराध से पार्कों को मुक्त कर रही है. इसी मुहिम पर ईटीवी भारत के संवाददाता धनंजय वर्मा की ये स्पेशल रिपोर्ट.
नई दिल्ली: आज पूरी दुनिया को झकझोर रही नशे की बुरी लत ने किसी भी देश को नहीं बख्शा है, और भारत भी इस घातक समस्या की चपेट में तेजी से आ रहा है, लेकिन, इसी अंधेरे में दिल्ली पुलिस की एक पहल एक नई सुबह की रोशनी लेकर आई है.
राजधानी दिल्ली के सार्वजनिक सुरक्षा को अमल में लाते हुए पुलिस ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने न सिर्फ अपराधियों की कमर तोड़ दी है, बल्कि आम नागरिकों के मन में खोया विश्वास भी वापस लौटाया है. ‘ऑपरेशन विमुक्त’ नाम की इस मुहिम का संकल्प साफ है. दिल्ली के रिहायशी इलाकों के पार्कों को नशे और अपराध की गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त करना और वहां एक सुरक्षित माहौल बनाना.
पार्कों को असामाजिक तत्वों से बचाने की मुहिम
अक्सर देखा जाता है कि शाम ढलते ही मोहल्लों के पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाते हैं. कहीं झाड़ियों के पीछे नशे का कारोबार होता है, तो कहीं शराब की महफिलें जमती हैं. इस तरीके से शाम होते ही पार्क ओपन बार में तब्दील हो जाते हैं. इन गतिविधियों के कारण महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग पार्कों में जाने से कतराने लगे थे. इसी समस्या को जड़ से मिटाने के लिए डीसीपी (पश्चिम) दरदे शरद भास्कर के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन विमुक्त’ की शुरुआत की गई है, जो अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है. यह अभियान सिर्फ पश्चिमी दिल्ली तक ही नहीं सीमित रहा है बल्कि पूरे राजधानी के अन्य पार्कों की स्थिति को सुधार रहा है.
‘पार्क मित्र’ जनभागीदारी की नई मिसाल
इस अभियान की सबसे अनूठी और प्रभावी कड़ी ‘पार्क मित्र’ है. दिल्ली पुलिस ने महसूस किया कि सिर्फ डंडे के बल पर सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है, इसलिए उन्होंने समाज को अपना साझीदार बनाया. रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन (एमडब्ल्यूए) और स्थानीय सक्रिय निवासियों को इस मुहिम से जोड़कर उन्हें ‘पार्क मित्र’ का नाम दिया गया है. ये नागरिक मूकदर्शक नहीं हैं, बल्कि पुलिस की ‘आंख और कान’ बनकर काम कर रहे हैं. वे पार्कों में संदिग्ध गतिविधियों, ड्रग्स की सप्लाई या किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुंचाते हैं. जनता और पुलिस के बीच बना यह मजबूत सेतु ही इस अभियान की सफलता की असली इबारत लिख रहा है.
ऑपरेशन विमुक्त सिर्फ गश्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैज्ञानिक व रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित है. पुलिस ने पूरे पश्चिमी जिले में 265 पार्कों का सर्वे किया. इस सर्वे का उद्देश्य उन कमजोरियों को ढूंढना था जो अपराध को बढ़ावा देती हैं. सर्वे में उन कोनों की पहचान की गई जहां लाइट की व्यवस्था नहीं थी और अपराधी अंधेरे का फायदा उठाते थे. टूटे हुए गेट, रेगुलेटरी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की कमी व टूटी दीवारों को चिन्हित किया गया. इन खामियों को दूर करने के लिए पुलिस विभाग, नगर निगम व अन्य नागरिक एजेंसियों के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रहा है, जिससे पार्कों का वातावरण सुरक्षित हो सके.
अभियान की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 15 दिनों की सक्रिय फील्ड कार्रवाई में पुलिस ने अपराधियों व नियम तोड़ने वालों पर चौतरफा हमला बोला है. आंकड़े बताते हैं कि पुलिस की टीमें अब तक 444 से अधिक बार पार्कों का औचक निरीक्षण कर चुकी हैं. इस दौरान बड़ी कार्रवाई की गई है.
| निवारक हिरासत | कुल 325 व्यक्तियों को एहतियातन हिरासत में लिया गया. |
| नाबालिगों पर कार्रवाई | कानून का उल्लंघन करने वाले 50 बच्चों (CCL) को पकड़ा गया. उन्हें सुधार की दिशा में भेजा गया. |
| कानूनी शिकंजा | 65 दिल्ली पुलिस (DP) एक्ट के तहत रिकॉर्ड 4598 मामले दर्ज किए गए, जबकि 66 DP एक्ट के तहत 445 कार्रवाइयां हुईं. |
| सेक्शन 40A और अन्य | सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के खिलाफ धारा 40A के तहत 178 और CrPC की धाराओं (126/170 आदि) के तहत 79 निवारक कार्रवाइयां की गई हैं. |
‘विमुक्त चौपाल’: शाम 6 से 9 बजे का विशेष सुरक्षा चक्र
पुलिस की ये मुहिम अब पुलिस मुख्यालय से निकलकर अब जनता के बीच पहुंच रही है. प्रत्येक थाना क्षेत्र के दो पार्कों में प्रतिदिन ‘विमुक्त चौपाल’ लगाई जा रही है. शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक चलने वाली इन चौपालों में पुलिस के आला अधिकारी खुद मौजूद रहते हैं. यहां कोई भी नागरिक बिना किसी झिझक के नशे के सौदागरों या मोहल्ले के गुंडों की शिकायत करते हैं. इन चौपालों ने अपराधियों के मन में डर पैदा कर दिया है कि अब पुलिस की नजर उन पर हर वक्त है.
‘ऑपरेशन विमुक्त’ सकारात्मक कदम
पूर्व एसीपी और दिल्ली पुलिस महासभा के अध्यक्ष वेद भूषण ने बताया कि दिल्ली के अंदर कुछ इलाके ऐसे चिह्नित हैं कि वो अपने आप में सरकार के लिए , पुलिस के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज है. जैसे जनकपुरी एक थाना का एरिया है वहां एक भी झुग्गी कलस्टर नहीं है. परंतु हर ब्लॉक के लिए अंदर बड़े-बड़े पार्क हैं. कई बार लाइट की व्यवस्था कम होती है. कुछ आस-पास के इलाकों के…रीसेलेटमेंट कॉलोनीज के इलाकों के लोग आकर आश्रय ले लेते हैं. पूरी पूरी रात सोते रहते हैं. कुछ ऐसे अपराध हैं जो इन पार्कों के अंदर पनपते रहते हैं. जिस तरह से लोग ड्रग्स लेना शुरू कर देते हैं. ये सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी, दिल्ली पुलिस ने जिस तरह से एक रास्ता चुना है इसे आने वाले समय में सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जाए. क्योंकि पुलिस जब इन पार्कों के अंदर जाएगी तो असामाजिक तत्तवों के इतने पैर नहीं होते कि वो पार्कों में रुक सके.
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राकेश हंस ने बताया कि,
“दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन विमुक्त चलकर बहुत ही सराहनीय काम किया है, क्योंकि जो भी शरारती तत्व हैं. वह पार्क में आकर बैठने और गलत गतिविधियां करते थे.हम दिल्ली पुलिस के इस अभियान की सराहना करते हैं. इस तरीके के अभियान चलाते रहना चाहिए. हमने कई लोगों की टीम बनाई हुई है जो पार्किंग निगरानी करते हैं. यदि कोई गलत एक्टिविटी दिखती है तो हम पुलिस को सूचना भी देते हैं.”
रिटायमेंट के बाद ‘ऑपरेशन विमुक्त’ के लिए कर रहे मदद
दिल्ली पुलिस के ‘ऑपरेशन विमुक्त’ की पहल को दिल्ली पुलिस के पूर्व सब इंस्पेक्टर बलजीत सिंह राणा का भी सहयोग मिल रहा है. वर्ष 2012 में सेवानिवृत्ति के बाद भी पुलिस के साथ मानद सलाहकार के रूप में जुड़े रहे, इसके बाद वह नशे के खिलाफ अभियानों में काम करने लगे. ईटीवी भारत से बातचीत में बलजीत सिंह राणा बताते हैं कि पार्कों में लगातार जागरूकता और निगरानी से स्थिति में काफी सुधार हुआ है. वह रोज सुबह और शाम पार्कों में जाकर लोगों को समझाते हैं कि नशा न केवल स्वास्थ्य बल्कि परिवार और भविष्य के लिए भी नुकसानदायक है.
सशक्त टीम व भविष्य की राह
डीसीपी (पश्चिम) दरदे शरद भास्कर के नेतृत्व में इस पूरे ऑपरेशन को जमीन पर उतारने का श्रेय एडिशनल डीसीपी डॉ. सचिन कुमार सिंघल और एसआई मनीष के नेतृत्व वाली विशेष टीम को जाता है. डीसीपी दरदे शरद भास्कर के अनुसार यह कोई छोटा अभियान नहीं है. पुलिस आने वाले समय में ‘पार्क मित्रों’ के नेटवर्क को और अधिक विस्तार देगी. सीसीटीवी जैसी तकनीक का सहारा लेकर इन पार्कों को अभेद्य किले में तब्दील कर देगी.
पश्चिमी दिल्ली में विमुक्त की गूंज अब सुनाई देने लगी है. पार्कों में बच्चों की किलकारियां व बुजुर्गों की निश्चिंत चहलकदमी इस बात का प्रमाण है कि जब खाकी व नागरिक हाथ मिलाते हैं, तो अपराधियों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचता है. दिल्ली पुलिस का यह मॉडल अब अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है.